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आनंद ही जीवन का लक्ष्य: रामगढ़ कैंट में दिव्य आध्यात्मिक जागरण

  • लेखक की तस्वीर: BGSM
    BGSM
  • 24 फ़र॰
  • 2 मिनट पठन


31 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक छावनी फुटबॉल मैदान, रामगढ़ कैंट (झारखंड) एक दिव्य आध्यात्मिक वातावरण का साक्षी बना। प्रतिदिन सायं 5:30 बजे से 7:30 बजे तक आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला में सैकड़ों श्रद्धालु श्रद्धा और उत्साह के साथ उपस्थित हुए। विषय था — “आनंद ही जीवन का लक्ष्य”


पूज्य डॉ. स्वामी युगल शरण जी के श्रीमुख से निकले प्रत्येक वचन ने श्रोताओं के हृदय को स्पर्श किया। यह केवल प्रवचन नहीं थे, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मजागरण की एक गहन यात्रा थी। परिवार सहित लोग प्रतिदिन पहुँचते, महिलाएँ, युवा और बुजुर्ग सभी एकाग्र भाव से बैठकर सुनते। सुसज्जित मंच और भक्तिमय वातावरण ने पूरे आयोजन को और भी पावन बना दिया।


स्वामी जी ने सरल शब्दों में समझाया कि मनुष्य जीवन भर सुख की खोज में भटकता है — धन, मान-सम्मान और सुविधाओं के पीछे दौड़ता है — परंतु फिर भी भीतर एक खालीपन बना रहता है। इसका कारण यह है कि सच्चा आनंद बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे अपने अंतर्मन में निहित है।

उन्होंने बताया कि आनंद कोई दूर की वस्तु नहीं है, बल्कि हमारी वास्तविक प्रकृति है। केवल अज्ञान, वासनाएँ और गलत धारणाएँ उसे ढक देती हैं। सही ज्ञान, नियमित साधना और ईश्वर-प्रेम के माध्यम से उस आनंद का अनुभव किया जा सकता है।


20 फरवरी 2026 को श्रृंखला के समापन अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई — ब्रह्म गोपिका सेवा मिशन, रामगढ़ इकाई की स्थापना। अब रामगढ़ में नियमित साप्ताहिक सत्संग, युवा उत्थान शिविर और बाल संस्कार कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे, जिससे समाज में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जागरण निरंतर बना रहे।


समापन के समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष, कृतज्ञता और नई प्रेरणा स्पष्ट झलक रही थी। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अनेक लोगों के जीवन में नई दिशा का प्रारंभ बन गया।

संदेश स्पष्ट था —


आनंद बाहर नहीं, हमारे भीतर है; उसे केवल पहचानने और अनुभव करने की आवश्यकता है।


राधे राधे

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